DR. MAYA SHANKAR JHA

SOCIAL WORKER & TEACHER

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समलैंगिक विवाह

Posted by mayashankarjha on April 29, 2011 at 2:21 PM

 

बेटी ! तुम सुबह में उठकर कहो कि मै सावित्री, सीता बनूंगी ;

बेटा ! तुम राम बनने का निश्चय करो: -

समलैंगिक विवाह भारत को नरक बनाने की साजिस है I पहले क्रिकेट के खेळ में विदेशो से लाखो खर्च करके लाई गई अर्धनग्न  लडकियो को खडा करना, पुनः स्कूल- कालेजों  में यौन शिक्षा (Sex - Education ) की योजना है , जिसका अंतिम उद्देश्य था स्वच्छंद यौनाचरन (FREE SEX ) को मान्य बनाना और अब समलैंगिक विवाहो (Homo-Sexual Marriages) को  कानूनी रूप देने का अथक प्रयास !

आखिर मुठ्ठी भर लोगों  के द्वारा राष्ट्र की आत्मा-अस्मिता को तोडने का यह सुनियोजित प्रयास क्यो ? इसका उत्तर श्री मद भागवत के एक  श्लोक में मिल जायेगा ; इस मे कोई संदेह नही की पूरी दुनिया में हर जगह सफल होने के बाद दुष्ट शक्तियों (Hostile Forces) ने अपना अंतिम मोर्चा भारत में खोला है ; भारत है दुनियाका हृदय ;

पश्चिम का परिवार व्यभिचार के दलदल में डूब चुका है ; जिस कारण पश्चिमी सभ्यता अंतिम सांस ले रही है ; पर भारत का परिवार अभी भी ठीकठाक चलरहा है; परिवार है सभ्यता का आधार  ; परिवार टूटा की सभ्यता ध्वस्त हुई ;

कैसे टूटेगा भारतीय परिवार ; यही इन विरोधी शक्तियों  की चिंता का विषय है, इसीलक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होने भारत को भी व्यभिचार का नरक बनाने की पूरी चेष्टा शुरू कर दी है    ;  इसके लिए प्रचार के सुगम साधन के रूप में विदेश-नियंत्रित समाचार चैनल (News Channel) उपलब्ध है ही जो शुरू से ही भारतीय अर्थात हिंदू संस्कृति  को ध्वंस  करने की  चालाकी का  अभियान चला रहे है I

समलैंगिक विवाह का मतलब है मानव सभ्यता का पूर्ण विनाश; इस से बढकर अप्राकृतिक  कोई दूसरी बात नही हो सकती है ; विवाह मनुष्य की सब से पवित्र सम्बन्ध  है,  पर पश्चिम में यह ख़त्म हो चूका  है; पुरुष पुरुष से, स्त्री  स्त्री से विवाह करे, इससे भयावह स्थिति  क्या हो सकती है, पशु भी इस सीमा तक नही गये ; यहां महाकवि  रवींद्रनाथ टागोर के विचार की याद आ जाती है - जब आदमी जानवर हो जाता है, तो जानवर  से भी  कई गुणा गया - बीता हो जाता है ; समलैंगिक विवाहको जायज विवाह ठहराने के लिए तरह-तरह के थोथे तर्क गढे जा रहे हैं ; कहा जा रहा है कि समलैंगिक संबंध हर युग में बनते रहे हैं, इसीलिये उनको मान्यता मिलनी चाहिये ; तब तो हर युग में चोर-डकैत-हत्यारे बनते  रहे हैं, उनको भी मान्यता मिलनी चाहिये ; कभी-कभी ये लोग वेद-उपनिषद-महाभारत-रामायण की भी बात करने लगते हैं ; पर दुष्ट शक्तियों  ने बहुत पहले ही संस्कृत अर्थात भारत की सांस्कृतिक भाषा को यहां से निर्वासित कर दिया ; बिना संस्कृत एक अक्षर जाने हुये ये इन महान ग्रंथों  के बारे में कुच्छ भी बोलने  का अधिकार रखने लगे  हैं ;  सबसे मजाक की बात है कि ये बार-बार महाभारत के पात्र शिखण्डी का नाम लेते हैं , पर क्या शिखण्डी समलैंगिक था ?  महाभारत में उसका पूरा वर्णन है और समलैंगिक का समर्थन में उसका उदाहरण देना मूर्खता की हद है I

समलैंगिक विवाहों  को मान्यता मिली कि हमारी सुदृढ़  पारिवारिक व्यवस्था छिन्न-छिन्न हुई ; इसके बाद स्कूलों - कालेजों  में कैसा वातावरण बनेगा, इसके बारे में सोचकर रोंगटे खडे होजाते हैं ; जब किसी बच्चे या बच्ची को लगेगा कि समलैंगिक संबंध जायज है, तब उनमें  से बहुत ऐसे संबंध की ओर सहज ही आकर्षित हो सकते है I

मानवता के पुजारियों से  , सनातन धर्म मानने वाले सभी व्यक्तियों से  , भारत के सभी नागरिकों से  भारत भारती समाज का यह  नम्र निवेदन है कि  हरस्तर पर इस पाप पूर्ण योजना का विरोध कीजिये;  भारत पवित्रता के बल पर ही सारे झंझाबातों  को आज तक झेलते रहा है ; दुष्ट-शक्तियों  के इस अंतिम प्रयास को विफल करने के लिए घर-घर में पवित्र माहौल तैयार करने की जरुरत है ; हमारे घर में कोई बच्ची है, तो उससे कहें -  बेटी ! तुम सुबह में उठकर कहो कि मै सावित्री, सीता बनूंगी ; कोई बच्चा हो तो समझाओ कि तुम राम बनने का निश्चय करो I

विधाता ने शुरू से ही भारत के सामने दुनिया को बचाने का महान कार्य रखा है ; आज की ध्वस्त होती सभ्यता को एक मात्र  भारत की पवित्रता का संदेश ही बचा सकता है ; इस महान युग  में आहुति  देने के  लिए हमारे नौजवानों  को आगे आना होगा ; क्या यह देश , यह संस्कृति केवळ बाबा राम देव की ही है;  हमे भी इन विदेशी पाखंडियों  का पूर्ण - जोर विरोध करना होगा ; हमे भी बाबा रामदेव, गाँधी , तिलक , सुभाष , अन्ना हजारे जैसा  बनना होगा  i

आप का मित्र ,

 डॉ.माया शंकर झा ,

कोलकाता

 

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